Friday, January 17, 2014

सतरंगी सत्ता - अतरंगी हसरतें

सियासत एक ऐसा नशा है के जो इसकी गिरफ्त में आ जाए तो बस तौबा... इनसान पैर ज़मीन पर रखता है मगर ज़मीन पर चलना नहीं चाहता.. बुलंदियो के सिंहासन की चाहत होती ही कुछ ऐसी है.. कि फिर इन्सान भूल जाता कि उसकी शुरुआत कैसे हुई थी। दिल्ली के आसमान पर आम आदमी पार्टी के नाम का एक नया सूरज हज़ारो उम्मीदे लिये दमका तो लगा कि इसकी रौशनी पूरे भारत में फैल कर नई ऊर्जा का संचार करेगी.।. कांग्रेस के भ्रष्टाचार का अंधेरा दिल्ली से मिट चुका था.. और अरविंद केजरीवाल के जनता के हक में लिए गए ताबड़तोड़ फैसलों से उनकी पार्टी लुड़कते पारे के बीच देश भर में अपना दायरा बड़ाने लगी। लाखों की संख्या में लोग आम आदमी पार्टी के साथ जुड़ने लगे और ये सिलसिला अभी जारी है। लोगों को उम्मीद है कि आम आदमी पार्टी दूसरी पार्टियों से अलग है .. इसीलिए लोकसभा चुनाव में वो जीत दर्ज कर एक नये, उज्जवल, सुनहरे और भ्रष्टाचार मुक्त भारत का निर्माण करेगी।. लेकिन राजनीति में कहां कुछ अलग होता है, कोई पार्टी अलग हो भी जाए तो उसके कार्यकर्ता क्या अलग हो सकते हैं। अगर हाल के हंगामों पर नज़र डाली जाए तो साफ हो जाएगा.. कि सर पर टोपी लगा लेने और गैर राजनीतिक लिबास पहन लेने से राजनीति की कैफियत और राजनितिक्षों की फितरत नहीं बदल जाती।.. यहां भी वही बवाल है जो कांग्रेस और और बीजेपी में हैं। निजी महत्तवकांक्षाओं पर यहां भी पार्टी की विचारधारा ताक पर रख दी जाती है।...नाराज़गी की सीलन बड़ती है तो नई दीवार में भी दरार नज़र आने लगती है।.. दिल्ली में आप के विधायक बिन्नी की लोकसभा का टिकट पाने की हसरत का गला घुटने के बाद कुछ ऐसी ही दरार नज़र आयी।...लेकिन हाल बीजेपी का भी अच्छा नहीं है । केजरीवाल की बोली मोदी को चुभ रही है और ऐसी चुभ रही है की छतों पर सलमान के साथ पहुंचना पड़ता है, पतंग उड़ाना पड़ता है । मोदी जानते हैं मंजिल को साधने का हुनर लेकिन मुश्किल ये हैं केजरीवाल को दरकिनार करके वो लालकिले की चौखट तक नहीं पहुंच सकते । बीजेपी उलझी हुई है लेकिन कांग्रेस भी कहां सुलझी है । लगा था प्रदेश के विधान सभा चुनाव में पटखनी खाने के बाद कांग्रेस सबक लेगी और संभलकर आम चुनाव के मैदान में उतरेगी।.. मगर ये क्या ..कांग्रेसी तो एक दूसरे पर ही पिल पड़े। मौका था भीलवाड़ा में कांग्रेस की हार की समीक्षा बैठक का.. मगर समीक्षा की जगह फ्री स्टाइल कुश्ती शुरू हो गई।.. मुक्के, झापड़, लातें पटखी जिसे जो पैतरा आता था आज़मा लिया।.. रिंग में दोनों टीमों के कैपटन भी मौजूद थे.. एक- कांग्रेस के पूर्व मंत्री रामलाल जाट और दूसरे कांग्रेस नेता अक्षय त्रिपाठी। फिलहाल जो कुछ कांग्रेस में हो रहा है उससे तो बीजेपी और आप को फायदा ही है... क्योंकि दुश्मन की फौज आपस में ही भिड़ जाए इससे अच्छा सामने खड़ी फौज के लिए कुछ नही होता।.. 

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