प्यारे हिंदुस्तान कैसे हो...जानता हूं कि आजकल परेशान हो तुम.. बल्कि
परेशान की जगह तुम्हें हैरान कहूं तो ज़्यादा मुनासिब होगा। तुम्हारा परेशान होना
वाजिब भी है, पांच साल बाद बहुत से चेहरों को अपने हर एक कोने और ज़ररे पर फिर से
भ्रमण करता देख तुम विचलित भी हो रहे होगे और तुम्हे गुस्सा भी आ रहा होगा।... कोई
नही.. बुरा वक्त है.. टेंशन इत्तु सी भी मत लो.. टल जायेगा ये वक्त भी.. थोड़े दिन
गले फाड़े जायेंगे, नारे लगाए जाएंगे, हवा हवाई वादे और सीले हुए पटाख़ो जैसे दावे
किये जाएंगे.. फिर सब शांत हो जायेगा.. चुनाव खत्म हो जायेगा।.. कुछ जीत कर
राजधानी चले जाएंगे, कुछ बयान बहादुर बन जाएंगे और बाकी फिर से पांच साल का
इंतेज़ार करने में जुट जायेंगे।.. जानता हूं तुम इस शोर शराबे के खत्म होने के कई
दिनों बाद तक तकलीफ में रहोगे, हर लम्हा अपनी जनता की आंखों से बहोगे, तिल मिलाओगे,
गुस्सा भी करोगे, लेकिन फिर शांत हो जाओगे.. बहुत भोले और मासूम हो न, बहुत बड़ा
दिल जो है तुम्हारा.. तभी बार बार ना चाहते हुए भी यकीन कर लेते हो झूठे वादे करने
वालो का।.. मगर यार हिंदुस्तान एक बात बताओ... ये सब सहते रहना तुम्हारी मजबूरी है
या फिर इस सबकी आदत पड़ गयी है तुम्हे.. या फिर तुम्हे एहसास हो गया है कि अबतुम
कुछ कर नही सकते... पता नही क्या सोचते होगे तुम अपने बारे में.. मगर जहां से मैं
देखता हूं वहां से मुझे तो तुम योद्धा नज़र आते हो.. ना जाने कितनी ही रियासतों और
हुकूमतों के तख्त पलटे हैं तुमने.. न जाने कितने ही सिंहासन उखाड़ फेंके हैं.. ना
जाने कितने ही आंदोलनों और सत्याग्रह को जन्म दिया है तुमने.. फिर क्या हो गया
तुम्हें.. तुम तो पहले ऐसे कभी न थे जैसे अब दिखाई देते हो।.. वो धार, वो हनक, वो
धमक, वो रुतबा, वो इंतेकाम लेने का जज़्बा कहां गया तुम्हारा जो तुम्हारी पहचान
हुआ करता था।.. डियर हिंदुस्तान कुछ सोचों.. परेशान और हैरान होने से बहतर है...
अपनी ताकत का एक बार फिर से एहसास कराओ सबको... बस यार इतनी सी बात मान लो, तो मैं
भी कम से कम इस मुद्दे पर ज्ञान झाड़ने से तो बच जाऊं।...
तुम्हारा हमदर्द दोस्त आदिल....