Saturday, March 22, 2014

यार मेरे हिंदुस्तान...

प्यारे हिंदुस्तान कैसे हो...जानता हूं कि आजकल परेशान हो तुम.. बल्कि परेशान की जगह तुम्हें हैरान कहूं तो ज़्यादा मुनासिब होगा। तुम्हारा परेशान होना वाजिब भी है, पांच साल बाद बहुत से चेहरों को अपने हर एक कोने और ज़ररे पर फिर से भ्रमण करता देख तुम विचलित भी हो रहे होगे और तुम्हे गुस्सा भी आ रहा होगा।... कोई नही.. बुरा वक्त है.. टेंशन इत्तु सी भी मत लो.. टल जायेगा ये वक्त भी.. थोड़े दिन गले फाड़े जायेंगे, नारे लगाए जाएंगे, हवा हवाई वादे और सीले हुए पटाख़ो जैसे दावे किये जाएंगे.. फिर सब शांत हो जायेगा.. चुनाव खत्म हो जायेगा।.. कुछ जीत कर राजधानी चले जाएंगे, कुछ बयान बहादुर बन जाएंगे और बाकी फिर से पांच साल का इंतेज़ार करने में जुट जायेंगे।.. जानता हूं तुम इस शोर शराबे के खत्म होने के कई दिनों बाद तक तकलीफ में रहोगे, हर लम्हा अपनी जनता की आंखों से बहोगे, तिल मिलाओगे, गुस्सा भी करोगे, लेकिन फिर शांत हो जाओगे.. बहुत भोले और मासूम हो न, बहुत बड़ा दिल जो है तुम्हारा.. तभी बार बार ना चाहते हुए भी यकीन कर लेते हो झूठे वादे करने वालो का।.. मगर यार हिंदुस्तान एक बात बताओ... ये सब सहते रहना तुम्हारी मजबूरी है या फिर इस सबकी आदत पड़ गयी है तुम्हे.. या फिर तुम्हे एहसास हो गया है कि अबतुम कुछ कर नही सकते... पता नही क्या सोचते होगे तुम अपने बारे में.. मगर जहां से मैं देखता हूं वहां से मुझे तो तुम योद्धा नज़र आते हो.. ना जाने कितनी ही रियासतों और हुकूमतों के तख्त पलटे हैं तुमने.. न जाने कितने ही सिंहासन उखाड़ फेंके हैं.. ना जाने कितने ही आंदोलनों और सत्याग्रह को जन्म दिया है तुमने.. फिर क्या हो गया तुम्हें.. तुम तो पहले ऐसे कभी न थे जैसे अब दिखाई देते हो।.. वो धार, वो हनक, वो धमक, वो रुतबा, वो इंतेकाम लेने का जज़्बा कहां गया तुम्हारा जो तुम्हारी पहचान हुआ करता था।.. डियर हिंदुस्तान कुछ सोचों.. परेशान और हैरान होने से बहतर है... अपनी ताकत का एक बार फिर से एहसास कराओ सबको... बस यार इतनी सी बात मान लो, तो मैं भी कम से कम इस मुद्दे पर ज्ञान झाड़ने से तो बच जाऊं।...

तुम्हारा हमदर्द दोस्त आदिल....

Wednesday, March 5, 2014

कौन जायेगा दिल्ली ?

तो आखिरकार लोकसभा चुनाव की तारीखें घोषित हो ही गई।.. दुनियां के सबसे बड़े लोकतंत्र की सबसे बड़ी सभा का चुनाव 9 चरणों में होगा और फैसला आयेगा 16 मई को.. ये फैसला किसके हक़ में आयेगा ज़रा इस गणित को समझने की कोशिश करते हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि इस समय देश में मोदी की लहर है और इसी लहर के बहाव में बीजेपी NDA नाम की कश्ती पर सवार होकर दिल्ली की सत्ता तक पहुंचना चाहती है।. बीजेपी जानती है कि ये सफर उतना आसान नहीं है जितना की नज़र आ रहा है... बीजेपी के दिग्गज इस सफर में आने वाले ज्वार भाटों और बाकी कठनाईयों से भलीभाति परिचित हैं,.. और वो जानते हैं कि अगर ज़रा सी भी लपारवाही हुई तो NDA  की कश्ती रासता भटक कर अपनी मंज़िल से दूर हो जायेगी.. और फिर अगले सफर की शुरुआत के लिये उसे 5 साल तक इंतेज़ार करना पड़ेगा। बीजेपी ये इंतेज़ार कर नहीं सकती लेहाज़ा वो नए-पुराने मल्लाहों के सहारे अपनी कश्ती को दिल्ली तक ले जाने की कोशिशों में लगी है।. NDA की कश्ती पर जिन ताज़ा तरीन मल्लाहों की भर्ती हुई है उसमें रामबिलास पासवान, कलयाण सिंह, रामदास अठावले, उदित राज कुछ ऐसे नाम हैं जो अपने हुनर में महिर हैं।.. बात अगर हक़ीकत की ज़मीन पर बात करें तो बीजेपी को लोकसभा चुनाव में जिन बड़े राज्यों से अच्छी खबर आने की उम्मीद हैं वो हैं उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश।.. यूपी को छोड़ बाकी दो राज्यों में बीजेपी की सरकार है.. उम्मीद है कि बीजेपी को वहां मज़बूती मिलेगी... लेकिन क्या यूपी का जनमानस बीजेपी के चेहरे पर मुस्कुराहट बिखेरेगा ? बड़ा सवाल है।.. सबसे ज़्यादा लोकसभा सीटों वाले इस प्रदेश ने देश को सबसे ज़्यादा प्रधानमंत्री दिए... और संयोग है कि एक बार फिर प्रधानमंत्री की कुर्सी पर नज़र गढ़ाये 4 बड़े नेता इसी प्रदेश से चुनाव लड़ेंगे.. नरेंद्र मोदी इनमें से पहला नाम होंगे अगर वो यूपी से चुनाव लड़ते हैं तो,, बाकी के नाम राहुल गांधी, मुलायम सिंह और मयावती।.. मुलायम सिंह और मायावती तीसेरे मोर्चे या त्रिशंकु लोकसभा वाले हालात में अपनी दावेदारी पेश कर सकते हैं क्योंकि प्रधानमंत्री बनने के ख्वाब ये दोनों ही नेता देखते हैं। अगर कुछ विश्वसनीय चुनावी सर्वेक्षणों की मानें तो मुज़फ्फरनगर दंगों और बेकाबू गुंडागर्दी की तोहमतों के बावजूद यूपी की अखिलेश सरकार को लोकसभा चुनाव में बहुत ज़्यादा नुकसान होता नहीं दिख रहा.. और सूबे में बीजेपी को मिलने वाला फायदा कांग्रेस और बीएसपी के कोटे से आता दिख रहा है... यानि सूबे में सीधी टक्कर बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच है... लेकिन एक दल और है जो एंटी कांग्रेस वोट काट कर बीजेपी की नींदे हराम कर सकता है...आम आदमी पार्टी यानि राजनीतिक दुनियां का नया घोड़ा, जो भले ही रेस लगाते हुए 7 रेसकोर्स न पहुचे मगर दूसरे घोड़ो की रफतार को अपनी तिरछी चाल से धीमा ज़रूर कर सकता है और हो सकता है कि बीजेपी को तो मंज़िल तक पहुंचने ही न दे।..दिल्ली विधानसभा चुनाव में आपको गंभीरता से न लेने का मज़ा बीजेपी चख चुकी है, लेहाज़ा इस बार बीजेपी सतर्क है।..बिहार का गणित कहता है कि कांग्रेस और बीजेपी में से किसी का जादू नहीं चलेगा,, बल्कि क्षेत्रीय दल ही बाज़ी मारेंगे... असली लड़ाई नीतिश कुमार की जेडीयू और लालू की आरजेडी के बीच होगी। लेकिन इन दोनों की जीत के लिये मुस्लिम वोट हमेशा से एक बड़ा फैक्टर रहा है और अगर इन दोनों पार्टियों के बीच मुस्लिम वोट सही अनुपात में बंट गया तो फिर फायदा बीजेपी को मिलेगा.. क्योंकि बीजेपी के साथ दलितों के बड़े नेता रामबिलास पासवान का नाम जुड़ चुका है.. यानि मुकाबला यहां भी दिलचस्प होगा।. तमिलनाडू में जयललिता की हवा है जिनका रुझान बीजेपी और मोदी की तरफ है,,, पश्चिम बंगाल से ममता बनर्जी भी चुनाव बाद बीजेपी को ताकत दे सकती हैं... आंध्र प्रदेश के बंटवारे से नराज़ YSR कांग्रेस सुप्रीमों जगन मोहन रेड्डी कांग्रेस से बदला लेने के लिए NDA की ज़ीनत बड़ा सकते हैं।.. यानि कुल मिलाकर बीजेपी और मोदी की हवा में दम है... लेकिन तीसरे मोर्चे में शामिल दल और बाकी के दूसरे दल भी बीजेपी की राह का रोड़ा बन सकते हैं....और ऐसा भी हो सकता है कि भारत की सबसे बड़ी और पुरानी पार्टी होने के बावजूद अंडरडॉगसमझी जा रही कांग्रेस बाज़ी मार ले जाए.. सरकार बना कर ना सही तो बाहर से समर्थन देकर तीसरे मोर्चे की सरकार बनवा कर ही सही.... क्योंकि कांग्रेस की तो आधी जीत इसी में ही हो जायेगी कि बीजेपी दिल्ली के सिंहासन तक न पहुचे और मोदी की हवा निकल जाये।... चलिए देखते हैं क्या होगा.. मुक़ाबला तो यकीनन दिलचस्प होना है......
                             आदिल खान.......